उपन्यास अंश-९ (ताकि बचा रहे लोकतंत्र)उपन्यास अंश-९ (ताकि बचा रहे लोकतंत्र)

(नौ) वैशाली एक्सप्रेस के आरक्षण डिब्बे में शौचालय के आस - पास मुंह लटकाये बैठा है झींगना । उसके मन में कुछ खदबदा रहा है । वह अथाह सोच की गहराईयों में डूबा है कि कैसे यकबयक बदल ली है करबट उसकी जिन्दगी ने । जब होश संभाला था वह समाज की पिछली पंक्ति में अपने आप को पाया था । हिम्मत की और संजोये सपने का…

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30Jan2011

उपन्यास अंश-८ ( ताकि बचा रहे लोकतंत्र )उपन्यास अंश-८ ( ताकि बचा रहे लोकतंत्र )

(आठ) नगर थाना के बन्दीगृह के एक कोने में बैठा सुबक रहा झींगना । समझ नहीं पा रहा वह, कि कल रात हुए उस हिंदू - मुस्लिम राइट से उसका क्या लेना - देना ? वह तो कलाकार है, लोक - गायक है, दंगाई नहीं, वह भला किसी का खून क्यों करेगा ? जहां तक दिलावर मियां का प्रश्न है, वह तो नेक बंदा था उसकी मण्डली का । दिल…

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25Jan2011
 
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